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शिक्षा का महत्व

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          शिक्षा और मोक्ष  शिक्षा का प्रयोजन क्या है , मानव जीवन के मूल उद्देश्य से शिक्षा का क्या सम्बन्ध है । प्राचीन भारत की शिक्षा धर्म पर आधारित थी । शिक्षा का परम् उद्देश्य धर्माचरण की प्रवर्ति जाग्रत करने रहा है ।    परन्तु वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप एकदम से बदल गया है जिसका उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्ति तथा अधिक से अधिक माया संग्रह रह गया है । जिसमे व्यक्ति के मूल उद्देश्य का मार्ग अवरुद्ध किया है । मानव जीवन का    मूल उद्देश्य  👉         सभी संतो और सदग्रन्थों के अनुुसार मनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य भक्ति कर मोक्ष पाना है इसलिए परमात्मा ने कलियुग में मानव को शिक्षा दी और अक्षर ज्ञान से परिचित कराया ताकि ये अपने सदग्रन्थों को स्वयं पढ़कर सत्य भक्ति का निर्णय कर सके, पर मानव उच्च शिक्षा प्राप्त करके अहंकारी बन गया और परमात्मा भूल गया। उच्च शिक्षा भक्ति मार्ग में बाधक है क्योंकि ज्यादा शिक्षित व्यक्ति में अहंकार आता है जिसकी वजह से वे भक्ति मार्ग को समझने की कोशिश नहीं करते। भक्ति मार्ग ...

मनुष्य जीवन का नाश करता है ,नशा।

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नशा/नाश                       नशा / नाश     नशा , एक ऐसी बीमारी जो मनुष्य के आर्थिक स्थिति के साथ - साथ मानसिक, शारीरिक स्थिति ही नही वरन उसकी सामाजिक छवि को भी खराब करता है ।     सर्वप्रथम तो नशा, इंसान को शैतान बनाता है ।जिससे उसकी सामाजिक छवि धूमिल होती है । अब बात करे आध्यात्मिक उन्नति की नशा करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति भी क्षीण हो जाती है ।    कबीर साहेब जी कहते है कि :-      मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी, सत्तर जन्म कुत्ते के जानी।। शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी। ये खुद परमात्मा ने बताया है। आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को।   यदि आप शराब की लत नहीं छोड़ पा रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र से भी आपको इस बारे में सफलता नहीं मिली है। तो निराश न हों संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेकर आप इसे बड़ी आसानी से छोड़ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए देखिये साधना चेनल रात 7.30बजे से ।