मनुष्य जीवन का नाश करता है ,नशा।
नशा/नाश
नशा / नाश
नशा / नाश
नशा , एक ऐसी बीमारी जो मनुष्य के आर्थिक स्थिति के साथ - साथ मानसिक, शारीरिक स्थिति ही नही वरन उसकी सामाजिक छवि को भी खराब करता है ।
सर्वप्रथम तो नशा, इंसान को शैतान बनाता है ।जिससे उसकी सामाजिक छवि धूमिल होती है । अब बात करे आध्यात्मिक उन्नति की नशा करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति भी क्षीण हो जाती है ।
कबीर साहेब जी कहते है कि :-
मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी,
सत्तर जन्म कुत्ते के जानी।।
शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी। ये खुद परमात्मा ने बताया है। आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को।

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